Sunday, May 19, 2024
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बरेली का 7 नाथ प्रसिद्ध मंदिर जहां स्वयं विराजमान हैं भगवान शंकर 7 famous temples of Bareilly where Lord Shankar himself resides

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नमस्कार मित्रो कैसे है आप आशा करते है आप सभी बहुत अच्छे होंगे मित्रो अगर आप बरेली शहर में रहते है तो आपको जरूर पता होगा कि हमारे बरेली शहर को क्यों नाथ नगरी क्यों कहा जाता है अगर आपको फिर भी नहीं मालूम तो आज के इस लेख में हम आपको बताएँगे कि बरेली के 7 नाथ प्रसिद्ध मंदिर जहा स्वय विराजमान है भगवान शंकर।

देश की राजधानी दिल्ली और उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से करीब 250 किलोमीटर दूर स्थित हमारा बरेली शहर नाथ नगरी के नाम से विख्यात है। बरेली शहर को नाथ नगरी कहने के पीछे की अपनी धार्मिक मान्यताएं हैं। बरेली शहर के चारों दिशाओं में भगवान भोलेनाथ के सात प्राचीन नाथ मंदिर हैं। जिससे बरेली शहर का एक नाम सप्तनाथ नगरी भी  है।

बरेली शहर में स्थित 7 नाथ मंदिर होने के कारन भगवान शिव के यह सात मंदिर के अपने-अपने पौराणिक महत्व हैं और तो और प्रत्येक मंदिर से एक पुरातन कहानी जुड़ी है। कई सौ साल से लेके आजतक तक, इन मंदिरों से हर शिवभक्त की आस्था जुड़ी है। जहा एक तरफ सावन में उत्तराखंड के हरिद्वार, उत्तर प्रदेश के कछला और गढ़मुक्तेशगवर से गंगा जल लाकर इन मंदिरों में भगवान शिव को चढ़ाया जाता है। वही दूसरी तरफ लोग दूरदराज से भक्त यहां सातों नाथ मंदिर के दर्शन करने आते हैं।

जानकारी के लिए बताते चले कि वैसे तो आमतौर पर लोग साल भर बरेली के नाथ मंदिरों में भगवान् भोलेनाथ के दर्शन करते है, लेकिन श्रवण माह और शिवरात्रि पर इन मंदिरों की रौनक में चार चाँद लग जाते है।  उत्तराखंड के हरिद्वार, उत्तर प्रदेश के कछला और गढ़मुक्तेशगवर से गंगाजल लाकर लाखों शिव भक्त श्रवण माह में भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं। मान्यतानुसार नाथ मंदिरों में दर्शन कर लेने भर से ही मात्रा भगवान भोलेनाथ अपने भक्तों की सभी मनोकामना को पूरा कर देते हैं।

7 नाथ मंदिरो का इतिहास?

बरेली शहर में स्थित सभी सातो नाथ मंदिर के इतिहास के बारे बात की जाए तो मान्यता के अनुसार यह सभी शिवलिंग स्वंभू प्रकट हुए है। जिस कारण यहाँ सावन के महीने में मंदिरों में लाखो श्रद्धालु जलाभिषेक करने के लिए आते है।  ये सभी सातो नाथ मंदिर के नाम वनखंडीनाथ मंदिर, अलखनाथ मंदिर, त्रिवटीनाथ मंदिर, मढ़ीनाथ मंदिर, तपेश्वरनाथ मंदिर, पशुपतिनाथ मंदिर और धोपेश्वर नाथ मंदिर बरेली के प्रमुख व प्रसिद्ध मंदिर है।

वनखंडीनाथ मंदिर बरेली?

बाबा बनखंडी नाथ का मंदिर पूर्व दिशा में बरेली शहर के जोगी नवादा इलाके स्थित है। बाबा बनखंडी नाथ मंदिर को भी अति प्राचीन मंदिर माना जाता है। बाबा बनखंडी नाथ मंदिर की स्थापना राजा द्रुपद की पुत्री और पांडवों की पत्नी द्रौपदी ने की थी। द्रोपदी ने अपने राजगुरु द्वारा इस शिवलिंग की विधिवत पूजा अर्चना कर प्राण प्रतिष्ठा की थी उस समय यहां से  अविरल गंगा बहा करती थी। चारो तरफ वन से घिरे इस मंदिर को द्वापर युग में मुगल शासकों ने अनेको बार हमले किये।

कहा तो यहाँ तक जाता है कि आलमगीर औरंगजेब के सिपाहियों ने सैकड़ों हाथियों से शिवलिंग को जंजीरों से बांध कर नष्ट कराने की कोशिश की, परंतु शिवलिंग अपनी जगह से हिला तक नहीं और सारे सैनिक व हाथी मारे गए. जिसके कारण इस मंदिर का नाम वनखंडी नाथ मंदिर पड़ा।

अलखनाथ मंदिर बरेली?

अलखनाथ मंदिर उत्तर पश्चिम दिशा के किला इलाके में स्थित है यह मंदिर अत्यन्त प्राचीन मंदिर है मंदिर के महंत ने बताया कि इस क्षत्र में पहले खूब बांस का जंगल हुआ करता था जोकि चारो तरफ फैला हुआ था उस वक़्त एक बाबा आए थे। आनंद अखाड़ा के अलखिया बाबा ने मंदिर में स्थित एक बरगद के पेड़ के नीचे बैठ कर कई सालों तक तपस्या की।पास में ही शिवलिंग भी स्थापित था। शिवभक्तों के लिए अलख जगाई। उन्हीं के नाम से जोड़कर इस मंदिर का नाम अलखनाथ पड़ा और जिसके बाद बाबा ने उसी पेड़ के नीचे बाद में बाबा ने समाधि ले ली।

बरेली का 7 नाथ प्रसिद्ध मंदिर जहां स्वयं विराजमान हैं भगवान शंकर
बरेली का 7 नाथ प्रसिद्ध मंदिर जहां स्वयं विराजमान हैं भगवान शंकर

दूसरी कहावत के अनुसार मुगलकाल के दौरान जब सनातन संस्कृति को नष्ट किया जा रहा था तब धर्म की रक्षा के लिए आनंद अखाड़े के बाबा अलाखिया को यहां भेजा गया। शिव के अनन्य भक्त बाबा अलाखिया ने यहां भगवान शिव की कठोर तपस्या कर शिवलिंग को स्थापित किया गया। जिसके बाद मुस्लिम शासक बाबा के तपोवन में प्रवेश नहीं कर पाए।  और यहां अभी भी मुस्लिमों का प्रवेश वर्जित है का बोर्ड लगा हुआ है।

त्रिवटी नाथ मंदिर बरेली?

उत्तर कुबेर दिशा के प्रेमनगर इलाके में यह भव्य मंदिर स्थापित है। कहा जाता है कि यहाँ मंदिर करीब 7०० सौ साल है। और यहां महादेव स्वयंभू प्रकट शिवलिंग के रूप में विराजमान हैं। मान्यतानुसार यह मंदिर पहले चारो तरफ से घने वनो से घिरा हुआ करता था। और एक बार पशु चराने आया एक चरवाहा थक कर यहां एक वट वृक्ष के नीचे सो गया। जिसके बाद उस चरवाहे सपने में स्वयं महादेव आये और कहा – वो इस वट वृक्ष के नीचे विराजमान हैं।

बरेली का 7 नाथ प्रसिद्ध मंदिर जहां स्वयं विराजमान हैं भगवान शंकर
बरेली का 7 नाथ प्रसिद्ध मंदिर जहां स्वयं विराजमान हैं भगवान शंकर

जब उस चरवाहे की आंखें खुलीं तो उस चारवाहे ने भगवान का आदेश मानकर त्रिवट के नीचे खुदाई की तो उसे शिवलिंग के दर्शन हुए चरवाहा आश्चर्यचकित और प्रसन्न हो गया। जिसके बाद उसने शहर में जाकर लोगों को पूरी बात बताई। फिर वहां भक्तों का आना जाना शुरू हो गया। जिसके कारण इस मंदिर का नाम त्रिवटी नाथ मंदिर पड़ा।

श्री मढ़ीनाथ मंदिर बरेली?

पश्चिम दिशा में स्थित यह प्राचीन मंदिर पांचाल नगरी का है। जोकि सिटी के मढ़ीनाथ मोहल्ला स्थित है। श्री मढ़ीनाथ मंदिर भी काफी प्रसिद्ध मंदिर है। माना जाता है कि मढ़ीनाथ मंदिर पर एक बाबा आए थे। जिनके पास एक मढ़ीधारी सर्प था। फिर उन बाबा ने यहां तपस्या की थी। जिसके कारण इस मंदिर का नाम मढ़ीनाथ मंदिर पड़ा। यहां मणिधारी नाग है जो मंदिर में शिवलिंग की रक्षा करता है।

बरेली का 7 नाथ प्रसिद्ध मंदिर जहां स्वयं विराजमान हैं भगवान शंकर 7 famous temples of Bareilly where Lord Shankar himself resides
बरेली का 7 नाथ प्रसिद्ध मंदिर जहां स्वयं विराजमान हैं भगवान शंकर 7 famous temples of Bareilly where Lord Shankar himself resides

यहाँ कि मुख्य बात यह है कि मंदिर के साथ साथ यहां आसपास बसी घनी आबादी के मोहल्ले का नाम भी मढ़ीनाथ है। दूसरी कथानुसार कहा जाता है कि यह मंदिर 5000 साल पुराना है जो पांडवों ने अपने वनवास के दौरान बनवाया था। मढ़ीनाथ मंदिर में मौजूद शिवलिंग की स्थापना भी पांडवों द्वारा ही की गयी थी।

तपेश्वर नाथ मंदिर बरेली?

दक्षिण भूतनाथ सुभाषनगर इलाके में स्थित ये मंदिर कई ऋषियों और संतों की तपोस्थली रहा है। जिसके कारण इस मंदिर का नाम तपेश्वर नाथ मंदिर पड़ा। यहां आज से कई सौ साल पहले चारों तरफ केवल जंगल ही जंगल हुआ करते थे। और यहाँ कि खास बात यह थी कि यहाँ से अविरल गंगा बहा करती थी। कहावतों के अनुसार यहाँ पर एक पीपल का पेड़ हुआ करता था, जिसके नीचे शिवलिंग प्रकट हुआ था।

यहाँ पर उन्होंने उन्होंने चार सौ साल तक तपस्या की थी और यहाँ अनेको संत आये जैसे कि भालू बाबा और उनके बाद और भी कई संत आते रहे और तपस्या निरंतर रूप से चलती रही और इसी के चलते कालांतर में यह स्थल श्री तपेश्वर नाथ के नाम से प्रसिद्ध हुआ। यहाँ बाबा के दर्शन को भक्तो की भीड़ लगी रहती है और बाबा अपने भक्तो कि सभी मनोकामनाओ को पूर्ण करते है।

पशुपति नाथ मंदिर बरेली?

पीलीभीत बाई पास रोड पर स्थित श्री पशुपति नाथ मंदिर यूं तो ज्यादा पुराना नहीं है मगर यहां बरेली के प्रसिद्ध नाथ मंदिरों में गिना जाता है। इस मंदिर का निर्माण नेपाल में स्थित पशुपतिनाथ मंदिर की तर्ज पर कराया गया है। इस मंदिर का निर्माण आज से २४ साल पूर्व में समाजसेवी श्री जगमोहन सिंह के द्वारा कराया गया था। वही इस मंदिर में छोटे छोटे 108 शिवलिंग मौजूद है। वही मंदिर परिसर के बीच में बड़ा तालाब है और उस तालाब के मध्य में पशुपति नाथ जी स्थापित है। पुरे सावन माह में पशुपतिनाथ मंदिर में हजारों कावड़िए द्वारा यहाँ बाबा पशुपति नाथ पर जलाभिषेक किया जाता है।

धोपेश्वर नाथ मंदिर बरेली?

बरेली के सदर कैंट के दक्षिण मध्य अग्निकोण में धोपेश्वर नाथ मंदिर स्थित है। इस मंदिर के इतिहास कि बात करे तो यह मंदिर आज से करीब 5000 वर्ष पुराना है। मान्यतानुसार यहाँ धूम्र ऋषि ने कठोर तपस्या की थी जिसके बाद उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें दर्शन दिए और धूम्र ऋषि ने भगवान से जनकल्याण के हितार्थ हेतु भगवान्य शिव से यहाँ विराजने की प्रार्थना की। जिसके बाद यहां स्थापित शिवलिंग को धूम्रेश्वर नाथ के नाम से जाना जाने लगा।  वर्तमान में ये मंदिर धोपेश्वर नाथ नाम से जाना जाता है।

बरेली का 7 नाथ प्रसिद्ध मंदिर जहां स्वयं विराजमान हैं भगवान शंकर
बरेली का 7 नाथ प्रसिद्ध मंदिर जहां स्वयं विराजमान हैं भगवान शंकर

वही दूसरी कथा के अनुसार शहर के कैंट के सदर बाजार स्थित बाबा धोपेश्वर नाथ मंदिर महाभारत काल में पांडव, कौरव और भगवान श्रीकृष्ण के युग का साक्षी रहा है। महाभारत में पांडवों के एक गुरु ध्रूम ऋषि ने यहां तपस्या की थी। और उन्होंने अपने प्राणो का त्याग यही किया था जिसके बाद लोगों ने यहां उनकी समाधि बना दी बाद में उस समाधि के ऊपर शिवलिंग की स्थापना की गई। जिसका नाम धोपेश्वर नाथ रखा गया

मित्रो यह लेख हमने अपने जानकारी व इंटरनेट पर उपलब्ध जानकारी के आधार पर लिखा है। इस लेख में हमसे अगर कोई त्रुटि हुई हो तो उसके लिए हमें क्षमा कर दीजियेगा। आशा करते है कि आपको यह  जरूर पसंद आया होगा। अगर यह लेख पसंद आया हो तो इस लेख को अपने मित्रो व अपनी परिजनों के साथ जरूर साझा करियेगा। जिससे उनको भी बरेली के 7 नाथ मंदिरो के इतिहास के बारे में पता चल सके।

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